वैज्ञानिकों को मिला मानव इतिहास का 'खोया अध्याय'
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👉🏻जर्मनी.
⭐यूरोप में करीब 15 हजार साल पहले बड़ी संख्या में इंसानों का पलायन हुआ था। यूरोपीय पूर्वजों पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि दूसरे इलाके के एक समूह द्वारा स्थानीय शिकारियों व अन्य लोगों को पूरी तरह से हटा दिया गया था। यूरोप में प्लाईस्टोसीन से हॉलोसीन (हिमयुग का समय) के बीच के 30 हजार सालों में रहे लोगों के मिले दांत और हड्डियों से मिले डीएनए के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट फॉर सायंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री के शोधकर्ताओं ने उस काल से जुड़ी और जेनेटिक जानकारी पाने की कोशिश में यह अप्रत्याशित खोज की।
संस्थान के सदस्य जॉहेनिस क्रॉस ने कहा, 'हमने मानव इतिहास का एक बिल्कुल अनजान अध्याय खोल दिया है। हिमयुग के अंत में इंसानों की एक बहुत बड़ी जनसंख्या में बदलाव आया था।' इस 'खोए युग' के तथ्यों पर काम करते हुए शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि करीब 35 हजार से सात हजार साल पहले 35 शिकारियों का समूह इटली, जर्मनी, बेल्जियम, फ्रांस, चेक रिपब्लिक और रोमानिया में रहा था। इन लोगों में से तीन के मिले डीएनए 'हैप्लोग्रुप M'के हैं। इससे पता चलता है कि ये सभी एक ही वंश के थे। इस हैप्लोग्रुप की मौजूदगी आधुनिक यूरोपियन लोगों में लगभग मिट चुकी है। लेकिन आधुनिक एशियन, ऑस्ट्रेलियन और लेटिन अमेरिकन लोगों में यह आम है।
इन जगहों पर इस समूह की अनुपस्थिति से वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में बसने के लिए गैरअफ्रीकी लोगों का बिखराव हुआ। हालांकि यह भी जान पड़ता है कि किसी विशेष समय में किसी एक समूह के बिखराव से सभी गैरअफ्रीकी लोगों का बिखराव हो गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि शायद ऐसा 50 हजार साल पहले हुआ हो।
यह अपनेआप में एक बड़ी खोज है, लेकिन शोधकर्ताओं के लिए बड़ा आश्चर्य करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले यूरोप में एक बड़ी जनसंख्या का बदल जाना है। उनके मुताबिक ऐसा हिमयुग के अंत में हुआ था। टीम के एक और सदस्य ऐडम पॉवेल ने बताया, 'हमारा नमूना बताता है कि उस मौसमी उथल-पुथल की अवधि में हिमयुग के समय से जीवित बचे रहे इन शिकारों वंशजों को किसी दूसरी पॉप्युलेशन द्वारा हटा दिया गया था।'
शोधर्कताओं का अगला कदम इस खोज के संबंध में यूरोपियन वंशजों और उनकी संख्या में हुए बदलाव के तथ्यों की और बेहतर और स्पष्ट तस्वीर सामने लाना है।
Wednesday, 10 February 2016
वैज्ञानिकों को मिला मानव इतिहास का 'खोया अध्याय'
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SCIENCE TECHNOLOGY
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